बीस साल की उस लड़की ने रणवीर सिंह को कैसे चौंका दिया?
एक बच्ची, जो कभी टीवी विज्ञापनों में मुस्कुराती नज़र आती थी, आज उसी पर्दे पर रणवीर सिंह के सामने खड़ी है — और पूरा बॉलीवुड उसे नए सिरे से देख रहा है।
Mehboob Studio के बाहर उस दिन भीड़ कुछ ज़्यादा ही थी। Dhurandhar का टीज़र रिलीज़ होने वाला था, और स्टूडियो के गेट पर खड़े हर शख़्स की ज़ुबान पर बस एक ही नाम था — सारा अर्जुन। किसी को यक़ीन नहीं हो रहा था कि जिस लड़की ने कभी तमिल फ़िल्मों में बाल कलाकार के तौर पर काम किया था, वो अब रणवीर सिंह की लीडिंग लेडी बनकर सामने आएगी। और वो भी ऐसी फ़िल्म में, जिसमें संजय दत्त, आर. माधवन, अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल जैसे नाम पहले से मौजूद हों। ये कोई छोटी बात नहीं थी। सारा अर्जुन का जन्म 18 जून 2005 को हुआ था। उनके पिता राज अर्जुन एक्टर हैं और मां सान्या अर्जुन डांस टीचर। यानी शुरू से ही कला उनके घर की हवा में थी। महज़ डेढ़ साल की उम्र में सारा को पहला टीवी विज्ञापन मिला, और उसके बाद तो जैसे ये सिलसिला रुका ही नहीं। सौ से ज़्यादा विज्ञापनों में काम करने के बाद 2011 में सारा ने हिंदी फ़िल्म 404 से बड़े पर्दे पर कदम रखा। लेकिन असली पहचान मिली तमिल सिनेमा से। अब यहाँ रुककर एक बात कहनी ज़रूरी है — बॉलीवुड में ऐसा कम ही होता है कि कोई बाल कलाकार सीधा लीडिंग लेडी बन जाए। ज़्यादातर के लिए ये सफ़र बीच में ही कहीं खो जाता है। सारा अर्जुन के साथ ऐसा नहीं हुआ।
चाइल्ड आर्टिस्ट से लीडिंग लेडी तक — वो सफ़र जो आसान नहीं था
2011 में आई तमिल फ़िल्म देइवा थिरुमगल में सारा ने अभिनेता विक्रम के साथ काम किया। इस फ़िल्म में सारा ने एक ऐसे पिता की बेटी का किरदार निभाया जो मानसिक रूप से अक्षम था और अपनी बेटी की कस्टडी के लिए लड़ रहा था। इस भूमिका के लिए सारा को विजय अवॉर्ड्स में स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड — बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट मिला। फिर 2014 में सेवम फ़िल्म के लिए भी उन्हें यही सम्मान मिला। दो बार लगातार एक ही अवॉर्ड जीतना — ये किसी इत्तेफ़ाक़ से कम नहीं था। 2015 में सारा ने हिंदी फ़िल्म जज़्बा में ऐश्वर्या राय बच्चन की बेटी का किरदार निभाया। इसी फ़िल्म में इरफ़ान ख़ान भी थे। सोचिए, इतनी छोटी उम्र में इतने बड़े कलाकारों के साथ सेट पर खड़ा होना — कितना सीखने को मिला होगा उस बच्ची को, है ना? फिर आया साल 2022, और उसके साथ आई मणिरत्नम की महत्वाकांक्षी पीरियड फ़िल्म पोन्नियिन सेल्वन। दोनों भागों में सारा अर्जुन ने ऐश्वर्या राय बच्चन के किरदार नंदिनी का बचपन निभाया। ये फ़िल्म बड़ी हिट रही, और इसी के बाद सारा अर्जुन की नेटवर्थ 10 करोड़ रुपए आंकी गई — उस वक़्त उन्हें भारत की सबसे अमीर बाल कलाकार भी कहा गया। हालांकि 18 साल की होते ही ये टैग स्वाभाविक रूप से उनसे छिन गया, क्योंकि तकनीकी तौर पर वो अब बाल कलाकार रह ही नहीं गई थीं। खैर, ये तो एक पड़ाव था। असली इम्तिहान अभी बाक़ी था।
1,300 लड़कियों में से चुनी गई सारा — धुरंधर की कास्टिंग कहानी
अब बात करते हैं धुरंधर की। ये फ़िल्म आदित्य धर ने बनाई है, और 5 दिसंबर को रिलीज़ हुई थी। कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने बाद में एक इंटरव्यू में बताया कि सारा अर्जुन को इस रोल के लिए क़रीब 1,300 लड़कियों के ऑडिशन के बाद चुना गया था। ये आंकड़ा ही बताता है कि टीम इस किरदार को लेकर कितनी संजीदा थी। फ़िल्म में सारा ने यालिना जमाली का किरदार निभाया है — एक पाकिस्तानी नेता की बेटी, जो रणवीर सिंह के किरदार हम्ज़ा अली से शादी करती है। मुकेश छाबड़ा ने साफ़ कहा कि रणवीर का किरदार एक चालाक जासूस है जो सारा के किरदार को जाल में फंसाने की कोशिश करता है, और इसीलिए उम्र का फ़र्क़ कहानी के लिए ज़रूरी था — महज़ इत्तेफ़ाक़ नहीं। उनका कहना था कि 26-27 साल की उम्र की अनुभवी अभिनेत्रियां भी मौजूद थीं, लेकिन उससे किरदार की वो मासूमियत और कमज़ोरी शायद कम हो जाती जो कहानी मांगती थी। छाबड़ा ने ये भी कहा कि सारा को पहले से जानते थे — बरसों से वो ऑडिशन देने आती रहीं, और एक "प्यारी लड़की" के तौर पर उनकी पहचान बनी। जब आख़िरकार उसने ऑडिशन दिया, तब जाकर छाबड़ा को उसकी छुपी हुई प्रतिभा नज़र आई। टीम को शुरू से पता था कि इतना बड़ा उम्र का फ़ासला दिखाकर लोग सवाल उठाएंगे, फिर भी उन्होंने स्क्रिप्ट के प्रति ईमानदार रहने का फ़ैसला किया।
कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने एक इंटरव्यू में कहा कि आजकल कई डायरेक्टर, ख़ासकर आदित्य धर जैसे फ़िल्ममेकर, नए चेहरों को ज़्यादा मौक़ा दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि इरादा यही था कि पूरी दुनिया एक ताज़ा नज़रिए से गढ़ी जाए, इसलिए एक "सरप्राइज़ कास्टिंग" का फ़ैसला लिया गया, ताकि सारा का चेहरा पूरी तरह नया लगे — भले ही वो पहले बाल कलाकार के तौर पर कुछ फ़िल्में कर चुकी हों।
अब यहाँ एक बात साफ़ कर दूं — ये कोई ऐसी कास्टिंग नहीं थी जो चुपचाप हो गई और किसी को पता ही नहीं चला। टीज़र आते ही सोशल मीडिया पर तूफ़ान खड़ा हो गया था।
टीज़र आया और सोशल मीडिया पर मच गया हंगामा
जिस दिन धुरंधर का पहला लुक टीज़र रिलीज़ हुआ, रणवीर सिंह को सारा अर्जुन के साथ रोमांटिक सीन में देखकर दर्शकों की भौंहें तन गईं। रणवीर सिंह की उम्र 40 साल है और सारा सिर्फ़ 20 साल की — यानी पूरे 20 साल का फ़ासला। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने कास्टिंग के फ़ैसले का बचाव किया, कुछ ने खुलकर नाराज़गी जताई। ये कोई छोटी-मोटी चर्चा नहीं थी — कई बड़े प्रकाशनों ने इस पर अलग से रिपोर्टिंग की। लेकिन दिलचस्प बात ये रही कि सारा अर्जुन ख़ुद इस पूरे विवाद से काफ़ी हद तक अनजान रहीं। उन्होंने बाद में एक इंटरव्यू में बताया कि रिलीज़ से पहले वो सोशल मीडिया पर ज़्यादा सक्रिय नहीं थीं, इसलिए उम्र के फ़र्क़ को लेकर जो शोर मचा, वो उन तक पहुंचा ही नहीं। एक अजीब सी राहत की बात है ये, नहीं? इतने बड़े विवाद के केंद्र में होकर भी बेख़बर रहना। जब सारा से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कास्टिंग को कहानी के हिसाब से जायज़ ठहराया। उन्होंने रणवीर सिंह की जमकर तारीफ़ की — उन्हें अपना "सबसे पसंदीदा को-एक्टर" बताया और कहा कि वो एक दोस्ताना और उत्साहवर्धक इंसान हैं। सारा के मुताबिक़, रणवीर ने कभी अपनी सीनियोरिटी का एहसास उन्हें महसूस नहीं होने दिया, और सेट पर वो हर किसी को साथ लेकर चलने वाले शख़्स हैं — चाहे वो एक्टिंग हो या फिर सेट डिज़ाइन जैसी बारीक़ चीज़ें। फ़िल्म रिलीज़ होने के बाद कहानी ही कुछ और हो गई। धुरंधर ने बॉक्स ऑफ़िस पर धमाल मचा दिया — रिलीज़ के 10 दिनों के भीतर ही घरेलू कलेक्शन 334 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया, और वैश्विक कलेक्शन 10 अरब रुपए के आंकड़े को पार कर गया। यानी जो विवाद रिलीज़ से पहले उठा था, वो बॉक्स ऑफ़िस की कामयाबी के सामने काफ़ी हद तक ठंडा पड़ गया। कहते हैं ना, आख़िरकार पैसा ही आख़िरी शब्द बोलता है इस इंडस्ट्री में।
सेट पर एक बच्ची, दिग्गजों के बीच
सोचकर देखिए — एक 20 साल की लड़की, जिसने ज़्यादातर करियर बाल कलाकार के तौर पर बिताया, अचानक संजय दत्त, आर. माधवन और अक्षय खन्ना जैसे मंझे हुए कलाकारों के बीच सेट पर खड़ी है। घबराहट होना लाज़मी थी। सारा ने बाद में एक इंटरव्यू में माना कि सेट पर पहुंचकर उन्हें स्टारस्ट्रक महसूस हुआ, ख़ासकर संजय दत्त को देखकर — उनकी मौजूदगी में एक अलग ही "कूल और मज़बूत आभा" थी, ऐसा सारा ने कहा। ये भी दिलचस्प है कि इतने बड़े नामों के बीच काम करने के बावजूद, सारा का सबसे गहरा जुड़ाव रणवीर सिंह के साथ ही बना। शायद इसलिए क्योंकि दोनों की स्क्रीन पर सबसे ज़्यादा साझेदारी थी, या शायद इसलिए कि रणवीर का काम करने का तरीक़ा ही ऐसा है कि हर नया कलाकार सहज महसूस करे। जो भी हो, सारा ने कई बार दोहराया कि रणवीर उनके करियर का सबसे यादगार को-स्टार अनुभव रहेगा — और आने वाले समय में किसी और के साथ काम करके भी शायद ये तुलना टूटे नहीं, ऐसा उनका मानना है। यहाँ एक पल रुककर सोचना बनता है — इंडस्ट्री में बड़े सितारों के साथ नए चेहरों का बर्ताव अक्सर चर्चा का विषय बनता है। कई बार नए कलाकार शिकायत करते हैं कि सीनियर एक्टर्स उन्हें तवज्जो नहीं देते। सारा की कहानी में ऐसा कुछ सुनने को नहीं मिला — कम से कम अब तक जो सार्वजनिक तौर पर सामने आया है, उसमें नहीं।
आगे क्या? धुरंधर 2 और तेलुगु में डेब्यू
सारा अर्जुन का सफ़र यहीं नहीं रुकता। धुरंधर पार्ट 2 के मार्च में रिलीज़ होने की बात हो रही है, और उससे पहले सारा तेलुगु फ़िल्म यूफोरिया से तेलुगु सिनेमा में बतौर लीडिंग एक्ट्रेस डेब्यू करने वाली हैं — इस फ़िल्म के 6 फ़रवरी को रिलीज़ होने की जानकारी सामने आई है। यानी एक के बाद एक, सारा अपने करियर के नए मोर्चे खोल रही हैं। मुकेश छाबड़ा ने एक इंटरव्यू में ये भी संकेत दिया कि धुरंधर 2 में सारा अर्जुन के किरदार को और विस्तार मिलेगा, और दर्शकों को उनके किरदार को देखकर हैरानी होगी। उन्होंने ये भी कहा कि उम्र के फ़र्क़ को लेकर जो सवाल आज उठ रहे हैं, उनके पीछे की असली वजह आने वाली फ़िल्म में और साफ़ हो जाएगी — बिना ज़्यादा राज़ खोले, छाबड़ा ने बस इतना भर कहा कि "हर फ़ैसले का जवाब फ़ौरन नहीं मिलता, कुछ जवाब वक़्त के साथ ही खुलते हैं।" अब ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा कि सारा अर्जुन का ये नया सफ़र कहाँ तक जाता है। लेकिन इतना तय है — जिस लड़की को कभी सिर्फ़ "चाइल्ड आर्टिस्ट" के तमग़े से जाना जाता था, उसने अब बॉलीवुड को अपनी मौजूदगी का एहसास ज़ोर-शोर से करा दिया है। और शायद यही सबसे बड़ी जीत है — एक ऐसा सफ़र जो बचपन के विज्ञापनों से शुरू होकर, राष्ट्रीय स्तर की बड़ी बजट फ़िल्म की लीडिंग लेडी बनने तक पहुंचा। हाँ, और एक बात — इस पूरे विवाद और सफलता के बीच जो चीज़ सबसे ज़्यादा उभरकर आई, वो है सारा का ठंडे दिमाग़ से हालात संभालना। बीस साल की उम्र में, इतने बड़े विवाद के केंद्र में होकर भी शांत बने रहना — ये हर किसी के बस की बात नहीं। शायद बचपन से कैमरे के सामने बड़े होने का यही फ़ायदा होता है।