लगान के सेट पर वो कार्ड्स क्लब किसने बनाया था, जानते हैं?
एक फ़िल्म जो पूरी दुनिया में मशहूर हुई, और उसके पीछे एक ऐसा सेट था जहाँ पैकअप के बाद ताश की महफ़िलें देर रात तक सजती थीं।
भुज के उस सुनसान सेट पर, जहाँ लगान की शूटिंग चल रही थी, शाम ढलते ही एक अजीब सी हलचल शुरू हो जाती थी। कैमरे बंद, लाइट्स ऑफ़, और फिर शुरू होता था ताश का दौर। मगर शुरुआत में ये सिलसिला इतना आसान नहीं था — क्योंकि आमिर ख़ान और निर्देशक आशुतोष गोवारिकर को ये बात कतई पसंद नहीं थी कि उनकी टीम के एक्टर्स ब्रेक मिलते ही कार्ड्स लेकर बैठ जाएं। एक दिन तो हद ही हो गई। आमिर और आशुतोष ने सीधे एक्टर्स से कह दिया कि ये कार्ड्स खेलने वाला सिलसिला बंद होना चाहिए। ज़ाहिर है, ये बात किसी को भी अच्छी नहीं लगती — और लगान की टीम के एक्टर्स भी इससे अछूते नहीं थे। उन्हें ये टोका-टाकी नागवार गुज़री। फ़िल्म में गूंगे ढोल बजाने वाले बाग़ा का किरदार निभा रहे अमीन हाजी ने ये बेचैनी महसूस की, और आख़िरकार उन्होंने ही हिम्मत जुटाकर आमिर और आशुतोष तक ये बात पहुंचाई कि टीम को ये रोक-टोक अच्छी नहीं लग रही। आमिर ख़ान को ये बात समझ आई — और यहीं से शुरू हुई एक दिलचस्प कहानी।
जब आमिर ख़ान ख़ुद बन गए कार्ड्स क्लब के मेंबर
अमीन हाजी के मुताबिक़, एक दिन आमिर ख़ान ने पूरी टीम को बुलाया और ऐलान कर दिया कि आज से वो भी सबके साथ कार्ड्स खेलेंगे — बस एक शर्त थी, खेल पैकअप के बाद ही शुरू होगा। और उसके बाद तो जैसे बांध ही टूट गया। शाम को पैकअप होते ही शुरू होने वाला ये खेल कई बार देर रात तक चलता रहता। आमिर ख़ान ने तो बाक़ायदा एक "लगान प्लेइंग कार्ड्स क्लब" तक बना डाला। अमीन हाजी ने एक इंटरव्यू में ये भी बताया कि जब रात की शिफ़्ट में शूटिंग होती थी, तब आमिर ख़ान सुबह छह बजे से कार्ड्स खेलना शुरू कर देते और दोपहर तक खेलते रहते — उसके बाद जाकर सोते। यानी बॉलीवुड के सबसे मेहनती और अनुशासित एक्टरों में गिने जाने वाले आमिर ख़ान का एक बिल्कुल अलग, मस्तीखोर रूप भी उस सेट पर देखने को मिला। चूंकि अमीन हाजी ख़ुद कार्ड्स नहीं खेलते थे, तो उन्हें एक अलग ही ज़िम्मेदारी मिल गई — अगर देर रात किसी कलाकार को भूख लगे, तो उसके लिए खाने का इंतज़ाम करना। अमीन हाजी बताते हैं कि वो ज़्यादातर ऑमलेट ही बनाया करते थे। और हां, कोल्ड ड्रिंक्स की भी कोई कमी नहीं थी सेट पर — शूटिंग शुरू होने से पहले आमिर ख़ान ने एक सॉफ़्ट ड्रिंक कंपनी के लिए विज्ञापन शूट किया था, और उस कंपनी ने बदले में उन्हें ढेर सारी कॉम्प्लीमेंट्री कोल्ड ड्रिंक्स दी थीं, जो आमिर पूरी टीम के लिए सेट पर साथ रखते थे।
आशुतोष गोवारिकर के "ख़बरी" बन गए थे अमीन हाजी
अब एक दिलचस्प मोड़ — अमीन हाजी, आशुतोष गोवारिकर के काफ़ी क़रीबी थे, और इसी वजह से आशुतोष ने उन्हें एक अनौपचारिक ज़िम्मेदारी सौंप रखी थी: सेट पर क्या चल रहा है, बाक़ी एक्टर्स आपस में क्या बातें कर रहे हैं, ये सब आशुतोष तक पहुंचाना। यानी सीधे शब्दों में कहें तो अमीन हाजी, आशुतोष और आमिर के लिए एक तरह के "ख़बरी" बन गए थे। मगर ये राज़ ज़्यादा दिन छुपा नहीं रह सका। अमीन हाजी ख़ुद बताते हैं कि एक दिन किसी तरह बाक़ी एक्टर्स को भनक लग गई कि वो आशुतोष को हर बात की ख़बर पहुंचाते हैं। उसके बाद माहौल कुछ बदल गया — जो साथी कलाकार पहले खुलकर बातें करते थे, वो अमीन के सामने आते ही चुप हो जाने लगे, या फिर बातचीत बीच में ही रोक देते। सोचिए, कितना अजीब होगा ये एहसास — अपनी ही टीम के बीच अचानक एक अनकहा फ़ासला महसूस होना, वो भी सिर्फ़ इसलिए कि आप निर्देशक के भरोसेमंद निकले। खैर, ये तो फ़िल्म सेट की राजनीति का एक छोटा सा नमूना भर है। हर बड़ी फ़िल्म के पीछे ऐसी छोटी-छोटी कहानियां छुपी होती हैं, जो कभी परदे पर नहीं दिखतीं।
अमीन हाजी ने एक इंटरव्यू में लगान की पांच महीने लंबी शूटिंग को याद करते हुए बताया कि सभी कलाकार उस दौरान बुरी तरह थक चुके थे। रघुबीर यादव तो हद दर्जे तक परेशान हो गए थे, और मज़ाक़िया अंदाज़ में गाते हुए अक्सर कहते — "कब छूटेगी रे ये लगान?" ये लाइन बाद में टीम के बीच एक तरह का मज़ाक़िया जुमला ही बन गई थी, जिसे सुनकर सब हंस पड़ते।
9/11 की वो रात, और ह्यूस्टन में फंसी लगान की टीम
लगान रिलीज़ होने के बाद आमिर ख़ान पूरी मुख्य कास्ट को लेकर अमेरिका के एक प्रमोशनल टूर पर गए थे। मगर ये टूर एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी — उसी दौरान अमेरिका में 9/11 की वो भयावह घटना हो गई। उस वक़्त लगान की टीम अटलांटा में थी। घटना के फ़ौरन बाद ये पूरी टीम सड़क के रास्ते ह्यूस्टन पहुंची, लेकिन फिर वहीं क़रीब तीन हफ़्तों तक फंसी रह गई। उन दिनों खाने-पीने की भारी दिक़्क़त हुई। टीम में कई कलाकार ऐसे थे जो सिर्फ़ शाकाहारी भोजन करते थे, और उस दौर के अमेरिका में शाकाहारी खाना ढूंढना किसी चुनौती से कम नहीं था। शुरुआती दिनों में तो टीम ने पिज़्ज़ा ब्रेड्स और चीज़ खाकर ही किसी तरह गुज़ारा किया। दिलचस्प बात ये भी है कि 9/11 से कुछ दिन पहले ही आमिर ख़ान किसी मीटिंग के सिलसिले में टूर छोड़कर कनाडा गए थे, और उस घटना के बाद वो वहीं फंसे रह गए — बाक़ी टीम से अलग। जब हालात ज़्यादा मुश्किल होने लगे, तब अमीन हाजी ने ह्यूस्टन में रहने वाली इस्माइली मुस्लिम कम्यूनिटी से संपर्क किया — अमीन हाजी ख़ुद भी इसी समुदाय से ताल्लुक़ रखते हैं। और फिर उस कम्यूनिटी के लोगों ने रोज़ डिब्बों में दाल-चावल, रोटी-सब्ज़ी बनाकर टीम तक भिजवाना शुरू कर दिया — जब तक टीम वहां फंसी रही, ये सिलसिला बिना रुके चलता रहा, और बदले में उन्होंने एक पैसा तक नहीं लिया। एक अजनबी शहर में, एक अनजान संकट के बीच, इंसानियत की ये मिसाल शायद लगान की पूरी यात्रा के सबसे भावुक हिस्सों में से एक है। ये सारी बातें अमीन हाजी ने साल 2021 में पत्रकार पैट्सी एन. को दिए एक इंटरव्यू में साझा की थीं — उस वक़्त लगान को बीस साल पूरे हो रहे थे, और टीम के कई सदस्यों ने पीछे मुड़कर उन दिनों को याद किया था।
अमीन हाजी का जन्म 6 जुलाई 1968 को हुआ था — यानी आज उनका जन्मदिन है। उनका एक जुड़वा भाई भी है, करीम हाजी, जो ख़ुद भी एक्टर हैं, और दोनों भाई देखने में इतने मिलते-जुलते हैं कि लगान के सेट पर भी अक्सर लोग उन्हें पहचानने में चूक जाते थे। हालांकि ग़ौर से देखने पर फ़र्क़ करना मुश्किल नहीं। लगान के ज़रिए मिली पहचान के बाद अमीन हाजी ने बाद के सालों में लेखन और निर्देशन की तरफ़ भी क़दम बढ़ाया — स्वदेस और जोधा अकबर जैसी फ़िल्मों में सह-लेखक के तौर पर उनका नाम जुड़ा, और उन्होंने कोई जाने ना नाम की फ़िल्म का निर्देशन भी किया, जिसमें आमिर ख़ान ने बतौर दोस्त एक स्पेशल सॉन्ग में भी काम किया था।