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Buzz · Parde Ke Peeche

शूटिंग कैंसिल हो सकती थी, पर जॉनी लीवर ने अपने पिता की सर्जरी की बात छुपाई क्यों?

रिधिमा कोहली 13 Jul 2026 6,101 views

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शूटिंग कैंसिल हो सकती थी, पर जॉनी लीवर ने अपने पिता की सर्जरी की बात छुपाई क्यों?

एक शख्स जो हर सेट पर हंसी बांटता है, उस दिन खामोश था — और वजह सुनकर पूरी यूनिट की आंखें भर आई थीं।

क्लब के अंदर लाइट्स जल रही थीं, कैमरा सेट था, और अब्बास-मस्तान "बादशाह" के ओपनिंग सीन की तैयारी में लगे थे। हर तरफ़ हलचल थी, मगर एक कोना ऐसा था जहां रौनक थोड़ी कम लग रही थी। जॉनी लीवर वहीं खड़े थे। अब जो लोग जॉनी लीवर को जानते हैं वो ये भी जानते हैं कि ये इंसान किसी भी सेट पर पहुंचे तो माहौल अपने-आप हल्का हो जाता है — डायरेक्टर की टेंशन हो या को-एक्टर की थकान, जॉनी का एक जुमला सब भुला देता है। तो उस दिन जब यही जॉनी लीवर उदास, गुमसुम, अपने-आप में खोए हुए दिखे — तो अब्बास-मस्तान की नज़र से बात छिप नहीं पाई।

पैक-अप के बाद वो एक सवाल

शॉट पैक होते ही अब्बास-मस्तान सीधे जॉनी के पास गए। कोई लंबी बात नहीं, बस इतना पूछा — जॉनी भाई, आज बात क्या है? इतने डिप्रेस्ड क्यों लग रहे हो? जॉनी ने जवाब दिया कि उसी दिन उनके पिता की एक बड़ी सर्जरी हुई थी, और वो खुद उस वक्त पिता के पास नहीं थे। सेट पर मौजूद होकर भी मन कहीं और था — अस्पताल के किसी कमरे में, जहां उनके पिता अकेले लेटे थे।

यहां एक बात समझनी ज़रूरी है — जॉनी लीवर का परिवार से रिश्ता हमेशा से बेहद क़रीबी रहा है, ये बात इंडस्ट्री में किसी से छिपी नहीं। कॉमेडी के पर्दे के पीछे एक बेहद संवेदनशील इंसान छिपा है, जो अपने पिता की एक सर्जरी की खबर सुनकर भी, यूनिट के शेड्यूल की फ़िक्र करता रहा। सोचिए ज़रा — कितने लोग होंगे जो निजी संकट में भी प्रोफेशन की ज़िम्मेदारी को इस तरह निभाते हैं?

"आपने बताया क्यों नहीं?"

अब्बास-मस्तान ने जब पूछा कि आपने ये बात पहले क्यों नहीं बताई, हम शूटिंग कैंसिल कर देते — तो जॉनी का जवाब कुछ ऐसा था जो उस दिन सेट पर मौजूद हर किसी को अंदर तक छू गया। जॉनी ने कहा कि उन्हें पता था कि बता देने पर शूटिंग रुक जाएगी, और वो नहीं चाहते थे कि क्लब बुक करने में जो पैसा और मेहनत लगी है वो बेकार जाए, न ही फ़िल्म का शेड्यूल बिगड़े।

अब्बास-मस्तान ने उस पल जॉनी लीवर से बस इतना कहा था — ये क्लब बुक करने में जो पैसा गया है, वो आपके पिता की ज़िंदगी से बड़ा थोड़ी है? शेड्यूल तो मैनेज हो ही जाता। आगे से कभी ऐसी कोई बात हो तो हमें बताया कीजिए, हम समझेंगे। ये कोई फ़िल्मी डायलॉग नहीं था — ये उस दिन सेट पर मौजूद रिश्तों की असली भाषा थी, जो पैसे और शेड्यूल से कहीं ऊपर रिश्तों को रखती थी।

यही वो किस्से हैं जो कभी अखबार की सुर्खियां नहीं बनते, प्रीमियर की रेड कारपेट पर नहीं दिखते — पर यही असली फ़िल्म इंडस्ट्री की तस्वीर होते हैं। कैमरे के पीछे इंसान भी वही होते हैं जो हमारे-आपके जैसे किसी भी दफ़्तर, किसी भी घर में होते हैं — डर, फ़िक्र, और ज़िम्मेदारी के बीच झूलते हुए।

"बादशाह" के 26 साल — आंकड़ों की ज़ुबानी

आज ही के दिन "बादशाह" को रिलीज़ हुए 26 साल पूरे हो गए। 27 August 1999 को रिलीज़ हुई शाहरुख़ खान की इस फ़िल्म का बजट 10 करोड़ रुपए था, और नेट कमाई रही 14 करोड़ 74 लाख रुपए। फ़िल्म को उस साल सेमी-हिट का दर्जा मिला था। 1999 की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फ़िल्मों की सूची में "बादशाह" 17वें नंबर पर रही।

उस साल टॉप-5 फ़िल्मों की बात करें तो पहले पायदान पर रही "हम साथ साथ हैं" — 17 करोड़ के बजट में 39 करोड़ 17 लाख की कमाई के साथ ब्लॉकबस्टर। दूसरे नंबर पर "बीवी नंबर वन" — 12 करोड़ के बजट में 25 करोड़ 58 लाख की कमाई, सुपरहिट। तीसरे नंबर पर "हम आपके दिल में रहते हैं" — 6 करोड़ 25 लाख के बजट में 17 करोड़ की कमाई, सुपरहिट। चौथे नंबर पर "हम दिल दे चुके सनम" — 16 करोड़ के बजट में 24 करोड़ की कमाई, हिट। और पांचवें नंबर पर "सरफ़रोश" — 8 करोड़ के बजट में 18 करोड़ 76 लाख की कमाई, हिट घोषित।

यानी उस साल की टॉप-5 में जगह न बना पाना कोई बड़ी असफलता नहीं थी — 1999 का बॉक्स ऑफिस वैसे भी कड़ी टक्कर वाला साल था। "बादशाह" का सेमी-हिट टैग उस भीड़ में भी अपनी अलग जगह बना गया था।

ट्विंकल खन्ना, शिल्पा शेट्टी और वो बदलाव जो किसी को याद नहीं

एक दिलचस्प तथ्य ये भी है कि "बादशाह" शाहरुख़ खान की अब्बास-मस्तान के साथ दूसरी फ़िल्म थी — इससे पहले दोनों "बाज़ीगर" में साथ काम कर चुके थे। ट्विंकल खन्ना के लिए ये अब्बास-मस्तान के साथ पहली और आख़िरी फ़िल्म रही, और शाहरुख़ खान के साथ भी ट्विंकल की ये इकलौती फ़िल्म थी। दिलचस्प बात ये है कि ट्विंकल से पहले इस फ़िल्म के लिए शिल्पा शेट्टी को साइन किया गया था, लेकिन किन्हीं वजहों से वो बाद में फ़िल्म से बाहर हो गईं और जगह ली ट्विंकल खन्ना ने।

और हां, एक बात और — यही वो फ़िल्म थी जिसके बाद से शाहरुख़ खान को "बादशाह" का टैग मिलना शुरू हुआ, जो आगे चलकर उनकी पहचान का एक हिस्सा बन गया। सोचकर देखिए, एक सेमी-हिट फ़िल्म ने एक स्टार को ऐसा खिताब दे दिया जो आज तीन दशक बाद भी उनके नाम से चिपका हुआ है।

खैर, ये तो सबको पता है कि बॉलीवुड में खिताब और टैगलाइन कैसे चलते हैं — कभी एक डायलॉग, कभी एक फ़िल्म का नाम, और स्टार की पहचान हमेशा के लिए बदल जाती है। पर जॉनी लीवर वाला किस्सा उस दिन की याद दिलाता है जब कैमरे के पीछे भी इंसानियत बची हुई थी — बिना किसी शो के, बिना किसी हेडलाइन की चाहत के।

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